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जापान में हाहाकार: एक सप्ताह में आए 51 हजार से ज्यादा मामले, महामारी का खतरा बढ़ा
जापान में भी कोरोना ने कहर ढाया। जैसे तैसे इस महामारी पर काबू पाया, तो अब जापान में फिर नई समस्या उभर आई है। इन दिनों जापान में फ्लू का कहर बरपा रहा है। पूरे देश में फ्लू के मामले इस कदर बढ़ गए हैं कि मात्र एक सप्ताह में ही 51 हजार से ज्यादा मामले सामने आ गए हैं। जापान में फ्लू का प्रकोप महामारी के रूप में चेतावनी बन ग
जापान में हाहाकार: एक सप्ताह में आए 51 हजार से ज्यादा मामले
Japan Flu: कोरोना के कहर से दुनिया पूरी तरह उबर नहीं पाई है। वैक्सीन और बूस्टर डोज लगवाकर जरूर इस बीमारी की घातकता को कम कर दिया गया है, लेकिन इस महामारी ने दुनियाभर की इकोनॉमी को भी बहुत प्रभावित किया है। इसी बीच जापान में भी कोरोना ने कहर ढाया। जैसे तैसे इस महामारी पर काबू पाया, तो अब जापान में फिर नई समस्या उभर आई है। इन दिनों जापान में फ्लू का कहर बरपा रहा है। पूरे देश में फ्लू के मामले इस कदर बढ़ गए हैं कि मात्र एक सप्ताह में ही 51 हजार से ज्यादा मामले सामने आ गए हैं। जापान में फ्लू का प्रकोप महामारी के रूप में चेतावनी बन गया है।
जापानी स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि 29 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में पूरे जापान में फ्लू के रोगियों की संख्या देश में महामारी की चेतावनी के स्तर पर पहुंच गई है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफेक्शियस डिजीज द्वारा जारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि देश भर में हर चिकित्सा संस्थान में रोगियों की औसत संख्या 10.36 है, जो चेतावनी स्तर के 10 बेंचमार्क को पार कर गई। चेतावनी का स्तर आने वाले चार हफ्तों में महामारी के आने की आशंका का संकेत देता है।
एक हफ्ते में 51,000 से ज्यादा केस
आंकड़ों से पता चलता है कि जापान के सभी 47 प्रांतों में करीब 5,000 निगरानी वाले चिकित्सा संस्थानों ने नियमित रूप से सात दिनों की अवधि के दौरान कुल 51,000 से ज्यादा इन्फ्लूएंजा के मामलों की जानकारी दी है। प्रान्त में प्रति-अस्पताल के मुताबिक ओकिनावा में 41.23 पर सबसे, इसके बाद फुकुई में 25.38, ओसाका में 24.34 और फुकुओका में 21.70 मरीजों की संख्या की जानकारी दी है। यहां विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि फ्लू का संक्रमण सामान्य वर्षों के मुकाबले और ज्यादा फैल सकता है, 2021 और 2022 में कोविड-19 के सख्त उपायों से जाहिर तौर पर फ्लू के संक्रमण को काफी कम स्तर पर रखने में मदद मिली थी।

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