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क्या ई-कॉमर्स के फैलाव से बड़े शॉपिंग सेंटर बंद हो जायेंगे? क्या फेसबुक और यूट्यूब जैसी कंपनियां अमेजन जैसे दिग्गजों से कम्पटीशन करने के लिए ई-कॉमर्स में उतरेंगी? क्या ऐसा होने से दुनिया भर में 60 फीसदी से ज्यादा पारंपरिक स्टोर बंद हो जायेंगे? आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन, हर्ष गोयनका तो ऐसा ही मानते हैं। इस तरह की बात हाल ही में उन्होंने ट्विटर पर कही। इस चौंकाने वाले बयान पर ट्विटर यूजर्स ने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की। लेकिन अधिकांश का कहना था कि पारंपरिक स्टोर बंद होने की कल्पना करना भी अपशगुन होगा। आखिर करोड़ों लोगों का घर इन दुकानों से ही चलता है। इनके रोजगार का क्या होगा? एक यूजर लिखा कि आप अमेजन पर ढेरों वैरायटी देख और खरीद सकते हैं, जो स्टोर पर नहीं मिलती है।

बाजार जाना, पार्किंग तलाशना और अस्त-व्यस्त अलमारियों में पसंद की चीजें ढूंढना सिरदर्द से कम नहीं होता। फिर भी, कई ऐसी चीजें हो सकती हैं, जिनको खरीदने से पहले हम छूकर देखना, महसूस करना और ट्राई करके देखना चाहते हैं। इस नाते दुकानों पर जाना जरूरी हो जाता है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि “तकनीकी विकास एक सतत प्रक्रिया है। समय बीतने के साथ पारंपरिक स्टोर भी विकसित हो जायेंगे। फटाफट खरीदारी के लिहाज से पारंपरिक दुकानों की उपयोगिता बनी रहेगी। छोटी-मोटी और रोजमर्रा की खरीदारी इन्हीं दुकानों से संभव होती है। पड़ोस की किराना दुकानों से खरीदारी में सहूलियत रहती है और कभी-कभार वहां से उधार में भी खरीदारी संभव होती है।

ऑनलाइन मीडिया लोकप्रिय होने पर बहुत लोगों को लगा था कि किताबों और अखबारों का वजूद नहीं रहेगा, जबकि ऐसा हुआ नहीं। बहुत से लोग खरीदारी से पहले किसी वस्तु को ‘छूकर देखना और फील करना’ जरूरी मानते हैं, जो आगे भी रहेगा। इटली की कंसल्टेंसी फर्म फिनेरिया के अनुसार, अगले चार वर्षों में दुनिया भर में ई-कॉमर्स के जरिए होने वाली रिटेल बिक्री चार ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। पारंपरिक दुकानदारों को भविष्य में होने वाले बदलावों पर विचार करना चाहिए और अपने बिजनेस को ऑनलाइन लाने की इच्छा रखनी चाहिए। यदि वे ऑनलाइन मौजूदगी का विकल्प नहीं चुनते हैं, तो वे ऐसे ग्राहकों को खो देंगे, जो घर बैठे सुविधाजनक तरीके से खरीदारी करना चाहते हैं। ऑफलाइन और ऑनलाइन का मेल करते हुए चलने में ही भलाई है।

वह दिन दूर नहीं, जब ई-कॉमर्स कंपनियां सामान की डिलीवरी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरू कर देंगी। फिर भी, विशेषज्ञों का मत है कि ऑफ़लाइन दुकानों और ऑनलाइन रिटेल स्टोरों को एक-दूसरे का पूरक होना चाहिए, न कि प्रतिस्पर्धी। तभी खरीदारों को संपूर्ण अनुभव मिल सकेगा। सभी प्रकार के भुगतान विकल्पों का होना भी एक निर्णायक कारक बनेगा। वर्चुअल स्टोर, मोबाइल या एम-कॉमर्स, चैटबॉट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे फैक्टर भी भविष्य में खरीदारी के रुझान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जो बच्चे 1980 से 1996 के बीच पैदा हुए हैं, उनको ऑनलाइन खरीदारी रास आती है, वो भी चौबीसों घंटे और सातों दिन खुले रहने वाले स्थानों से। जाहिर है, पारंपरिक दुकानदारों को बदलाव के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। परिवर्तन शाश्वत है। परिवर्तन से ही तरक्की होती है। परिवर्तन न होते तो दुनिया ऐसी न होती जैसी आज है। परिवर्तनों के लिए हरदम तैयार रहना चाहिए। व्यापारियों को भी और आम लोगों को भी।

By Admin

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