बर्फबारी से सेब उत्पादकों के चेहरों पर छाई लाली

322
Share

गोपेश्वर(चमोली)। पहाड़ों में नवंबर से हो रही बर्फबारी से सेब उत्पादकों के चेहरे पर लाली छाई हुई है। दिसंबर में हुई जबरदस्त बर्फबारी से उम्मीदें बढ़ गई हैं। उत्साहित बागवान मानते हैं कि यह क्रम बना रहा तो इस मर्तबा अच्छी फसल की उम्मीद परवान जरूर चढ़ेगी।
चमोली जिले में जोशीमठ और घाट ब्लॉक सेब के अच्छे उत्पादक क्षेत्र हैं। सुदूरवर्ती इन क्षेत्रों में करीब 300 गांव बर्फ से लकदक हैं। खेत-खलिहान हों या पहाड़ चारों ओर बर्फ का साम्राज्य है। जोशीमठ ब्लाक में रामणी गांव के बागवान सुदर्शन सिंह कठैत कहते हैं लंबे समय बाद कुदरत मेहरबान हुई है। पिछले साल कम बर्फबारी से उत्पादन प्रभावित हुआ था। मलारी हाईवे पर भापकुंड में सेब के कारोबारी मुरखुल्या सिंह रावत कहते है कि मार्च से सेब के पेड़ों पर फ्लावरिंग शुरू हो जाती है।
इस बार चिलिंग प्वाइंट अच्छा मिला है तो पैदावार भी अच्छी होनी चाहिए। बशर्ते यह क्रम मार्च के पहले सप्ताह तक बना रहे। चमोली के उद्यान निरीक्षक डीपी डंगवाल ने बताया कि जिले में 290 हेक्टेयर में सेब के बागान हैं और यहां औसतन 3200 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। वह कहते हैं कि सेब के लिए सबसे जरूरी है चिलिंग प्वाइंट। अच्छी पैदावार के लिए यह एक हजार से 1300 घंटे तक रहना चाहिए। इससे उत्पादन के साथ ही गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इस बार मौसम साथ दे रहा है।

LEAVE A REPLY