‘पवित्र रिश्ता’ में ऊषा ताई की भूमिका से घर-घर में मशहूर हुईं ऊषा नाडकर्णी को इंडस्ट्री में 7 दशक से भी ज्यादा का समय हो चुका

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‘पवित्र रिश्ता’ फेम ऊषा नाडकर्णी तब से काम कर रही हैं जब वह चौथी क्लास में थीं और अब वह 80 साल की हो चुकी हैं और इस उम्र में भी उन्होंने काम नहीं छोड़ा है। इस बीच उन्होंने बताया कि इस उम्र में भी वह इतनी एक्टिव कैसे हैं और कैसे खुद को लोगों की आलोचनाओं और तानों से दूर रखा है।’पवित्र रिश्ता’ में ऊषा ताई की भूमिका से घर-घर में मशहूर हुईं ऊषा नाडकर्णी को इंडस्ट्री में 7 दशक से भी ज्यादा का समय हो चुका है। वह मनोरंजन जगत में तब से एक्टिव हैं, जब वह चौथी में थीं। चौथी क्लास से एक्टिंग शुरू करने वालीं ऊषा नाडकर्णी ने टीवी के साथ-साथ फिल्मों और थिएटर में भी काम किया है। हाल ही में ऊषा नाडकर्णी ने अपने करियर और जर्नी के बारे में खुलकर बात की और बताया कि कैसे उन्होंने खुद को इस उम्र में भी काम करने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही उन्होंने इस पर भी चर्चा की कि वह खुद को आलोचनाओं, तानों से कैसे दूर रखती हैं।ऊषा नाडकर्णी ने हाल ही में राजीव खंडेलवाल के शो ‘तुम हो ना- घर की सुपरस्टार’ में अपनी एक्टिंग जर्नी और पर्सनल लाइफ के बारे में खुलकर बात की। इस दौरान दिग्गज अभिनेत्री ने कहा- ‘मैं तब से एक्टिंग कर रही हूं जब चौथी क्लास में थी। अब मेरी उम्र 80 साल चल रही है और मैं अभी भी लगातार काम कर रही हूं। एक्टिंग ही मेरा काम है और बचपन से ही मेरी चाहत थी कि मैं एक्टिंग करूं। लेकिन, मेरी मां को पसंद नहीं था। वो टीचर थीं तो उनके हिसाब से वही काम ठीक था। दरअसल, हम मिडिल क्लास वाले लोग आजू-बाजू वालों के बारे में बहुत सोचते हैं।’ऊषा नाडकर्णी ने आलोचनाओं और तानों पर बात करते हुए बताया कि उन्होंने कभी इन सब चीजों पर ध्यान दिया ही नहीं, क्योंकि उनका फोकस हमेशा से अपने काम पर था और यही सीख वह आज के युवाओं को भी देती हैं। उन्होंने कहा- ‘मेरा यही मानना है कि लोग भाड़ में जाएं। आपको जो करना है वो करना चाहिए। हम कुछ गलत नहीं कर रहे हैं वहां जाकर। मां-बाप का नाम खराब नहीं कर रहे हैं। तो बस दिमाग में यही चीज होनी चाहिए।’ऊषा नाडकर्णी ने अपने शेड्यूल के बारे में भी खुलकर बात की और बताया कि इस उम्र में भी वह अपने काम को कैसे मैनेज करती हैं। उन्होंने अपने पूरा शेड्यूल साझा करते हुए कहा – ‘मेरा शेड्यूल उठते ही शुरू हो जाता है। मैं सुबह पांच बजे उठ जाती हूं और फिर अपना डब्बा (लंच) खुद बनाती हूं। मैं डब्बा घर से ही लेकर जाती हूं, बाहर का नहीं खाती। भाजी, रोटी, चावल, दाल और छाछ। अगर किसी को एक बार काम की आदत लग गई ना तो फिर कोई और सोच दिमाग में आती ही नहीं है। घर, काम, काम, घर… बस यही चलता रहता है।’