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रत के पड़ोसी देश में बड़ा हादसा, भूस्खलन से 25 लोगों की मौत, 30 लापता, ये थी हादसे की वजह
आंतरिक कलह से जूझ रहे देश म्यांमार में भारी बारिश और बाढ़ की वजह से खदान धंसने का मामला सामने आया है। खदान में भूस्खलन की वजह से कई श्रमिक दब गए। इनमें से 25 लोगों के शव बरामद हुए हैं। कई लोग अब भी लापता हैं, जिन्हें ढूंढा जा रहा है।भारत के पड़ोसी देश में बड़ा हादसा, भूस्खलन से 25 लोगों की मौत, 30 लापता, ये थी हादसे की वजह
भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में बड़ा हादसा हो गया है। यहां एक भारी बारिश और बाढ़ की वजह से खदान में भूस्खलन होने के कारण 25 लोगों की मौत हो गई है। वहीं अभी भी 30 से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों की खोजबीन के लिए अभियान जारी है। यह हादसा म्यांमार के दूरदराज के इलाके में हुआ है। इमरजेंसी सर्विस के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि लापता लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मूसलाधार बारिश और बाढ़ के चलते रविवार को काचिन प्रांत के हपाकांत नगर के बाहरी इलाके में एक जेड खदान में भूस्खलन हो गया था।
एक बचावकर्मी ने मंगलवार को मीडिया को बताया कि रेस्क्यू अभियान के दौरान मंगलवार को 25 शव बरामद किए गए। 30 लापता लोगों की खोजबीन कर उन्हें निकालने का काम बुधवार को भी जारी रहेगा। बचावकर्मियों को शवों को ढूंढने के लिए कीचड़ हटाना पड़ा, तबाही का मंजर कुछ इस तरह था कि बचाव में लगे लोगों ने देखा कि वहां कुछ शव पानी में तैर रहे थे। बचावकर्मियों ने बताया कि जब खनन किया जा रहा था, उस दौरान करीब 150-180 मीटर (500-600 फीट) ऊंचा मिट्टी का ढेर भारी बारिश के कारण ढह गया।
क्या बताई जा रही हादसे की वजह?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारी बारिश और बाढ़ के चलते राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ है। बारिश की वजह से खदान का संचालन निलंबित कर दिया गया था। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि स्थानीय लोग कीचड़ में कुछ मूल्यवान पदार्थ की उम्मीद में जमा हुए थे, इस दौरान भूस्खलन होने से उसकी चपेट में आ गए।
जेड खदानों में बड़ी मात्रा में है प्राकृतिक संसाधन
जेड उद्योग पड़ोसी देश चीन में अत्यधिक प्रतिष्ठित रत्न प्राप्त करने के लिए कम वेतन वाले प्रवासी श्रमिकों पर निर्भर करता है। म्यांमार के उत्तर में जेड और अन्य प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों – जिसमें लकड़ी, सोना और एम्बर शामिल हैं, ने जातीय काचिन विद्रोहियों और सेना के बीच दशकों से चल रहे गृह युद्ध के दोनों पक्षों को वित्तपोषित करने में मदद की है। जबकि पर्यावरणविद् और अधिकार समूहों ने लंबे समय से खदान के तौर तरीकों में सुधारों की बात कही है।

By Admin

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