आज लोकसभा में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक नया बिल पेश किया है जो मनरेगा की जगह लेगा और नया ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून बनाया जाएगा। इस बिल का नाम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025 रखा गया है जिसे शॉर्ट फॉर्म में ‘VB जी.. राम जी’ के नाम से जाना जाएगा। इस बिल के जरिए सरकार नया रोजगार गारंटी कानून बनाने जा रही है जो मनरेगा की जगह लेगा। इसमें 125 दिन रोजगार की गारंटी होगी जबकि मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी होती थी। इस बिल में राज्यों की भी हिस्सेदारी तय की जा रही है जबकि मनरेगा में सिर्फ केंद्र की ही हिस्सेदारी होती थी लेकिन इस बिल को लेकर देश में जबरदस्त सियासी बवाल मच गया है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही है। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल पेश किया। यह बिल मनरेगा की जगह लेगा। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने नाम बदलने का विरोध किया है।मोदी सरकार के ‘जी राम जी’ बिल के खिलाफ लोकसभा में प्रियंका गांधी हल्ला बोल रही हैं। प्रियंका ने कहा है कि उन्हें नाम बदलने की ये सनक समझ में नहीं आ रही। ‘जी राम जी’ बिल के जरिए ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा है। कांग्रेस की रंजीता रंजन ने कहा है कि नाम बदलकर सरकार मुद्दों से ध्यान भटका रही है। सरकार को अब महात्मा गांधी के नाम से भी दिक्कत है।लोकसभा में ‘जी राम जी’ बिल पेश, प्रियंका बोलीं- नाम बदलने की सनक समझ से परे केंद्र सरकार आज MGNREGA की जगह पर एक नया बिल लाने की तैयारी में है। इस बिल के जरिए सरकार नया रोजगार गारंटी कानून बनाने जा रही है जो मनरेगा की जगह लेगा। इसमें 125 दिन रोजगार की गारंटी होगी जबकि मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी होती थी।’विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल 2025 संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया है। मनरेगा की जगह आ रहे ‘जी राम जी’ बिल पर लोकसभा में जमकर हंगामा हो रहा है। सदन में विपक्षी सांसद जी राम जी बिल को लेकर जमकर नारेबाज़ी कर रहे हैं। वहीं, थोड़ी देर में मोदी सरकार जी राम जी बिल को लोकसभा में पेश कर सकती है।
केंद्र सरकार आज MGNREGA की जगह पर एक नया बिल लाने की तैयारी कर रही है। इसका नाम ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025’ होगा। इस बिल के जरिए सरकार नया रोजगार गारंटी कानून बनाने जा रही है जो मनरेगा की जगह लेगा। इसमें 125 दिन रोजगार की गारंटी होगी जबकि मनरेगा में 100 दिन रोजगार की गारंटी होती थी। इस मुद्दे पर आज संसद में जोरदार बहस होने की संभावना है। मुझे नाम बदलने की यह सनक समझ नहीं आती। इसमें खर्चा बहुत होता है इसलिए मुझे समझ नहीं आता कि वे बेवजह ऐसा क्यों कर रहे हैं। MGNREGA ने गरीब लोगों को 100 दिन के रोज़गार का अधिकार दिया था। यह बिल उस अधिकार को कमज़ोर करेगा… उन्होंने दिनों की संख्या तो बढ़ा दी है लेकिन मज़दूरी नहीं बढ़ाई है। पहले ग्राम पंचायत तय करती थी कि MGNREGA का काम कहां और किस तरह का होगा, लेकिन यह बिल कहता है कि केंद्र सरकार तय करेगी कि फंड कहां और कब देना है, इसलिए ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा है। हमें यह बिल हर तरह से गलत लगता है- प्रियंका गांधी कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन विधेयक 2025 पर कहा, UPA सरकार ने MGNREGA कानून पेश किया था और यह सबसे सफल योजना रही है। COVID-19 के दौरान, जब लाखों लोग शहरों से गांवों में गए तो MGNREGA ने उन्हें सुरक्षा दी। जब नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारी, तो उनके मुंह से सिर्फ ‘हे राम’ शब्द निकले और यह अजीब बात है कि इस देश में आप महात्मा गांधी को भगवान राम से अलग कर रहे हैं। यह योजना, जो पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा फंडेड थी, आप इसे तोड़-मरोड़कर इसका बोझ राज्यों पर डाल रहे हैं। इस तरह यह योजना खत्म हो जाएगी।लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया। हालांकि सदन की कार्यवाही हंगामे के बीच चल रही है। अगर मनरेगा और जी राम जी में तुलना करें तो मनरेगा में 100 दिन गारंटी का प्रावधान है जबकि नए बिल में 125 दिन रोजगार की गारंटी है। मनरेगा में 15 दिनों में मजदूरी भुगतान का प्रावधान था जबकि नए कानून में हर हफ्ते मजदूरी भुगतान का प्रावधान। पहले खर्च सिर्फ केंद्र उठाती थी अब 10 से 40 प्रतिशत तक राज्यों को देना होगा। बुआई और कटाई के समय 60 दिनों तक रोजगार नहीं मिलेगा ताकि खेती के लिए मजदूर उपलब्ध हों। नए बिल पर समाजवादी पार्टी सवाल उठा रही है। कांग्रेस पार्टी जी राम जी बिल का विरोध कर रही है और कह रही है कि महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की कोशिश की जा रही है। तो वहीं, अखिलेश यादव कह रहे हैं कि सिर्फ नाम बदलने से कुछ नहीं होगा। बीजेपी सिर्फ नाम बदलकर दूसरे के काम को अपना बताती है।











