‘बेटियों की कस्टडी चाहिए’, कर्नाटक की गुफा में मिली रूसी महिला की बच्चियों के बिजनेसमैन पिता आए सामने
बीते 8 साल से जंगलों और गुफा में रह रही रूसी महिला की बच्चियों के पिता आखिरकार सामने आ गए हैं। इजराइली नागरिक डॉर गोल्डस्टीन ने साफ-साफ कहा है कि वह अपनी बेटियों के करीब रहना चाहते हैं। उन्होंने रूसी महिला नीना कुटीना के साथ बेटियों की कस्टडी साझा करने की इच्छा व्यक्त की है।
इजरायली नागरिक डॉर गोल्डस्टीन और अपनी 2 बेटियों के साथ रूसी महिसा।
कर्नाटक के गोकर्ण में एक रूसी महिला को अपनी दो बेटियों के साथ गुफा में रहते हुए पाए जाने के कुछ दिनों बाद, इस अनोखे अध्याय में अब एक नया किरदार सामने आया है- डॉर गोल्डस्टीन। इजरायली नागरिक डॉर गोल्डस्टीन ने खुले शब्दों में कहा है कि वह अपनी बेटियों 6 साल की प्रेया और 4 वर्ष की एमा के पास रहना चाहते हैं। उन्होंने साझा कस्टडी की मांग की है और कहा, ‘मैं सिर्फ उनके पास रहना चाहता हूं, एक पिता बनकर।’
गुफा से रूसी महिला और 2 बच्चियों के मिलने से हर कोई हैरान था। अब जानकारी सामने आई है कि इन बच्चों का पिता एक इजरायली नागरिक है। रूसी महिला नीना कुटीना ने ये दावा किया था कि उसने गोवा की एक गुफा में रहते हुए एक बच्चे को जन्म दिया था, और उसके पिता एक इजरायली बिजनेसमैन हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि रूसी महिला ने जिस इजरायली बिजनेसमैन के बारे में बताया है वह बिजनेस वीजा पर भारत में है और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने उसे खोज निकाला है।
उत्तर कन्नड़ जिले के कुमटा तालुक की शांत लेकिन दुर्गम रामतीर्थ पहाड़ियों में स्थित एक सुदूर गुफा से रूस की एक महिला एवं उसके दो छोटे बच्चों को बचाया गया। पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी थी और कहा था कि रूसी महिला आध्यात्मिक शांति की तलाश में वहां रह रही थी। उन्होंने बताया कि महिला की पहचान 40 वर्षीय नीना कुटीना उर्फ मोही के रूप में हुई है। वह ‘बिजनेस वीजा’ पर रूस से भारत आई थी। वह हिंदू धर्म तथा भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से बहुत ज्यादा प्रभावित हुई, इसलिए वह गोवा के रास्ते पवित्र तटीय शहर गोकर्ण पहुंची थी। नीना की दो बच्चियां भी हैं, जिनका नाम प्रेया (6) और अमा (4) है। ये सभी लगभग दो सप्ताह से जंगल के बीचोंबीच और पूरी तरह से एकांत में रह रहे थे।
पूजा और ध्यान में अपना दिन बिताती थी नीना
इस छोटे से परिवार ने घने जंगल और खड़ी ढलानों से घिरी एक प्राकृतिक गुफा के अंदर एक साधारण सा घर बना लिया था। नीना ने वहां रुद्र की प्रतिमा स्थापित की हुई थी। वह प्रकृति के बीच आध्यात्मिक शांति की तलाश में पूजा और ध्यान में अपना दिन बिताया करती थी। उसके साथ केवल उसके दो बच्चियां रही।
गुफा तक कैसे पहुंची पुलिस?
पुलिस ने बताया कि हाल ही में हुए भूस्खलन के बाद शुक्रवार को नियमित गश्त के दौरान पुलिस निरीक्षक श्रीधर और उनकी टीम ने गुफा के बाहर कपड़े लटके हुए देखे थे। उत्तर कन्नड़ के पुलिस अधीक्षक एम नारायण ने कहा, ‘‘हमारी गश्त टीम ने रामतीर्थ पहाड़ी में गुफा के बाहर सूखने के लिए साड़ी और अन्य कपड़े लटके हुए देखे थे। जब वे वहां गए तो उन्होंने नीना को उसके बच्चों प्रेया और अमा के साथ देखा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत ही हैरानी की बात है कि वह और उसके बच्चे जंगल में कैसे जीवित रहे और क्या खाते-पीते रहे। शुक्र है कि जंगल में रहने के दौरान उनके या उनके बच्चों के साथ कोई अनहोनी नहीं हुई।’’
2017 में ही समाप्त हो गया था वीजा
उनके अनुसार, महिला संभवतः गोवा से यहां पहुंची है। अधिकारी ने बताया कि यह भी पता चला कि महिला का वीजा 2017 में ही समाप्त हो गया था। वह कितने समय से भारत में रह रही है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। नारायण ने कहा, ‘‘हमने एक साध्वी द्वारा संचालित आश्रम में उसके रहने की व्यवस्था की है। हमने उसे गोकर्ण से बेंगलुरु ले जाने और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।’’ एक स्थानीय एनजीओ की मदद से रूसी दूतावास से संपर्क किया गया और उसे निर्वासित करने की औपचारिकताएं शुरू की गईं।











