अग्निवीरों को रोजगार की गारंटी देगी खट्टर सरकार, सीएम के बयान पर कांग्रेस ने किया पलटवार
विपक्षी दल कांग्रेस ने खट्टर से सवाल किया कि उनकी सरकार पूर्व सैनिकों को समायोजित करने के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण से परे एक और श्रेणी कैसे बनाएगी।अग्निपथ योजना को लेकर हरियाणा के सीएम का बयानकोई बेरोजगार नहीं रहेगा, हम इसकी गारंटी लेंगे: खट्टरयुवाओं को लुभाने के लिए उन्हें ‘लॉलीपॉप’ न दें: सुरजेवाला सेना में भर्ती के लिए केंद्र सरकार की नई अग्निपथ योजना को लेकर देशभर में भारी हंगामा हुआ है। इस बीच, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आज मंगलवार को ऐलान किया है कि हरियाणा सरकार सशस्त्र बलों में चार साल के कार्यकाल के बाद अग्निवीरों को रोजगार की गारंटी देगी। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने खट्टर से सवाल किया कि उनकी सरकार पूर्व सैनिकों को समायोजित करने के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण से परे एक और श्रेणी कैसे बनाएगी। मनोहर लाल खट्टर ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भिवानी में आयोजित राज्य स्तरीय एक कार्यक्रम में कहा, “मैं घोषणा करता हूं कि जो अग्निवीर हरियाणा सरकार की सेवाओं में शामिल होना चाहता है, उसे नौकरी की गारंटी दी जाएगी। कोई बेरोजगार नहीं रहेगा। हम इसकी गारंटी लेंगे।” मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा अग्निवीरों के लिए रोजगार सुनिश्चित करने वाला देश का पहला राज्य है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों को ग्रुप-सी सेवाएं यानी अराजपत्रित पद जैसे कि क्लर्क, शिक्षक, कार्यालय सहायक और पुलिस बल में शामिल किया जाएगा
गोवा में बीजेपी ने क्या रणनीति अपनाई?गोवा में कुल 40 विधानसभा सीटों के लिए साल 2017 में जब चुनाव हुए थे तो नतीजों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। उसे कुल 17 सीटें हासिल हुई थीं और दूसरे नंबर पर बीजेपी रही थी। बीजेपी को इस चुनाव में केवल 13 सीटें मिली थीं। चुनाव नतीजों में कांग्रेस बड़ी पार्टी थी लेकिन बीजेपी ने एमजीपी, जीएफपी व 2 निर्दलीय विधायकों के सहारे सरकार बना ली थी।
इसी तरह जब साल 2022 में जब गोवा विधानसभा के चुनाव नतीजे आए तो बीजेपी ने 20 सीटें जीती। यहां भी वह एक सीट से बहुमत पाने में नाकामयाब रही थी। फिर बीजेपी ने 3 निर्दलीय और महाराष्ट्रवादी गोमांतक (एमजीपी) के 2 विधायकों का सपोर्ट लिया और राज्य में अपनी सरकार बना ली।
कर्नाटक में बीजेपी ने क्या खेल खेला कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों पर साल 2018 में हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सबसे अधिक सीटें जीती थीं। उसे कुल 104 सीटें हासिल हुई थीं। लेकिन जेडीएस-कांग्रेस ने गठबंधन करके 120 सीटों के साथ सरकार बना ली थी। चूंकि कर्नाटक को बीजेपी अपने लिए एक अहम राज्य मानती है। अगर उसके हाथ से कर्नाटक निकला तो उसके लिए दक्षिण भारत का दरवाजा बंद हो जाएगा। यही वजह है कि बीजेपी ने यहां पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
साल 2019 में कर्नाटक में बीजेपी ने खेल खेला था। यहां जेडीएस-कांग्रेस की गठबंधन सरकार थी और एक समय ऐसा आया कि इस सरकार के 16 विधायक बीजेपी के संपर्क में आ गए। इसके बाद छह महीने भी नहीं बीते और जुलाई 2019 में 14 महीने पुरानी जेडीएस-कांग्रेस सरकार गिर गई। आज कर्नाटक में बीजेपी की सरकार है।
हरियाणा में क्या हुआ हरियाणा में साल 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जननायक जनता पार्टी (जजपा) से मिलकर सरकार बनाई थी। यहां भी चुनाव के दौरान काफी सरगर्मी रही थी लेकिन नतीजों के बाद तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साफ कर दिया था कि राज्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा और उपमुख्यमंत्री पद जजपा को दिया जाएगा। भाजपा ने यहां सरकार बनाने के लिए पहले निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल किया था, उसके बाद जजपा से बातचीत की थी।
इसके पीछे की रणनीति ये थी कि भाजपा नहीं चाहती थी कि उसे जजपा की सारी शर्तें माननी पड़ें, इसलिए उसने निर्दलीयों को साधकर बहुमत का आंकड़ा पाया। बाद में उसने जजपा से बात की। भाजपा केवल इसलिए जजपा का साथ चाहती थी, जिससे स्थिरता बनी रहे।
बिहार में क्या खेल हुआ 2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने जब नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार कमेटी का प्रमुख बनाया तो उसके विरोध में जेडीयू ने बिहार में भाजपा के साथ 17 साल पुराने गठबंधन को खत्म कर लिया। 2014 के लोकसभा में मिली असफलता के बाद जेडीयू और आरजेडी ने कांग्रेस के साथ मिलकर 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में साथ चुनाव लड़ा और बिहार में सरकार बना ली।
लेकिन 26 जुलाई 2017 को नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और 20 महीने पुराने महागठबंधन से पार्टी को अलग कर लिया। इसके अगले ही दिन उन्होंने बीजेपी के सहयोग से बिहार में सरकार बना ली और बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। बिहार में लालू यादव और नीतीश कुमार के बीच टूटी दोस्ती का फायदा बीजेपी ने उठाया और जेडीयू के सहयोग से बिहार में भी अपना वर्चस्व कायम कर लिया।











