चलती बस में दुष्कर्म : बड़ा खुलासा, पांच अगस्त को ही मालिक को मिल गई थी घटना की खबर

20
Share

फिरोजाबाद। यूपी के मैनपुरी की 16 वर्षीय छात्रा के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की वारदात जिस स्लीपर कोच बस में हुई थी, वह फिरोजाबाद एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत है। उसका मालिक अनिल जादौन शहर के थाना उत्तर के रैपुरा रोड स्थित इंदिरा कॉलोनी का रहने वाला है। उसे इस वारदात की जानकारी 5 अगस्त को ही लग गई थी। घटना के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा पूछताछ किए जाने के बाद से वह लापता है। बस मालिक न तो अपने इंदिरा कॉलोनी स्थित आवास पर है और न ही किसी परिचित या रिश्तेदार के संपर्क में है। उसका मोबाइल फोन चालू है। मगर, किसी का फोन नहीं उठा रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में घटी इस खौफनाक वारदात ने एक बेहद गरीब और साधारण परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है। मैनपुरी के किशनी क्षेत्र का यह पीड़ित परिवार मजदूरी करके अपने बच्चों का जीवन संवारने में जुटा था। पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 16 वर्षीय पीड़िता अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है।
गत 4 अगस्त को किसी बात से क्षुब्ध होकर वह घर से बिना बताए निकल गई थी। उसका इरादा नोएडा में रहने वाले अपने ताऊ (पिता के बड़े भाई) के घर जाने का था। पीड़िता के ताऊ नोएडा-दिल्ली क्षेत्र में रहकर एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। पीड़िता को लगा था कि वह सुरक्षित अपने ताऊ के पास पहुंच जाएगी, लेकिन रास्ते में ही वह हैवानों के हत्थे चढ़ गई।
पीड़िता के पिता पेशे से मजदूर हैं और दिन-रात मेहनत करके अपने पांच सदस्यों के परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मां गृहणी हैं जो घर का कामकाज संभालती हैं। पीड़िता से छोटे दो और मासूम बच्चे हैं, जिन्हें अभी इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि उनकी बड़ी बहन किस भयानक दौर से गुजर चुकी है।
दिल्ली बस सामूहिक दुष्कर्म मामले की पीड़िता का परिवार 8 अगस्त को गांव लौटने के बाद गत 30 अगस्त से फिर रहस्यमय ढंग से गायब हो गया है। किशनी पुलिस परिवार के सुरक्षित होने की बात कह रही है, लेकिन उनके वर्तमान ठिकाने व पीड़िता की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रही। उधर, दिल्ली पुलिस ने भी अभी तक मैनपुरी पुलिस को एफआईआर की कॉपी साझा नहीं की है, जिससे मामले में रहस्य गहराता जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि इतनी बड़ी घटना बीत जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस की ओर से मैनपुरी पुलिस को मामले की प्राथमिकी की कॉपी तक साझा नहीं की गई है। समन्वय की इस भारी कमी के कारण स्थानीय स्तर पर वैधानिक व सुरक्षात्मक कदम उठाने में बाधा आ रही है। विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि परिवार को किसी दबाव के चलते छुपाया गया है।
पीड़ित परिवार सामाजिक बदनामी और लोक-लाज के डर से पूरी तरह सहमा हुआ था। 4 अगस्त को हुई दरिंदगी के बाद 8 अगस्त को गांव लौटे परिवार ने किसी के सामने अपना दर्द बयां नहीं किया और अपने पड़ोसियों तक को इस खौफनाक वारदात की भनक नहीं लगने दी। मामला सामने आने के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।