विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने गिरेबान में झांके।

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पाकिस्तान के आरोपों के बारे में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने गिरेबान में झांके।
पाकिस्तान के कराची में शनिवार शाम को कुछ आतंकवादी सिंध रेंजर्स के मुख्यालय के अंदर घुस गए। इस हमले के नाकाम करने की कोशिश में चार सुरक्षाकर्मी मारे गए। हालांकि बाद में कुल छह आतंकवादियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। इस हमले के बाद भारत की तरफ से बयान सामने आया है। भारत ने इस आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान को नसीहत दी है कि उन्हें खुद के गिरेबान में झांकना चाहिए। इसके साथ ही भारत ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी जमीन पर मौजूद आंतकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्हें सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद का सहारा लेना छोड़ देना चाहिए
पाकिस्तान के आरोपों के बारे में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने कराची में हाल ही में हुई घटना को लेकर भारत पर पाकिस्तान के बेबुनियाद आरोपों वाली रिपोर्ट देखी है। हम उन्हें पूरी तरह से खारिज करते हैं। दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने गिरेबान में झांके, अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे और सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद का सहारा लेने की अपनी आदत को छोड़े।”कराची में हुए इस आतंकी हमले में चार सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। वहीं 6 आतंकवादियों को मार गिराया गया, जबकि एक हमलावर जिंदा पकड़ा गया है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार के आतंकवादियों ने इस घटना को अंजाम दिया है। यह घटना शनिवार रात लगभग 8:30 बजे कराची के घनी आबादी वाले गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में हुई। यहां स्थित सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय पर आतंकियों ने हमला किया। आतंकियों ने पहले तो धमाके किए, जिसके बाद लोग काफी सहम गए। बाद में फायरिंग करते हुए हमलावर सिंध रेंजर्स के मुख्यालय के अंदर घुस गए। इसके बाद सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच करीब 90 मिनट तक भीषण मुठभेड़ हुई। इस दौरान सुरक्षा बलों ने पूरे परिसर और आसपास की सड़कों को बंद कर दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली। यह संगठन टीटीपी का ही एक चरमपंथी गुट है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय है। यह नागरिकों, सुरक्षा बलों तथा सरकारी अधिकारियों पर हमले करता रहा है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और सीमा पार से हमले कराने का लगातार आरोप लगाती रही हैं। इसके जवाब में पाकिस्तान की सेना ने भी अफगानिस्तान के भीतर टीटीपी के कथित ठिकानों और प्रशिक्षण शिविरों पर कई बार कार्रवाई की है। बता दें कि अक्टूबर 2024 के बाद से कराची में यह पहला बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले कराची एयरपोर्ट के पास हुए आत्मघाती धमाके में दो चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी। इस घटना की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली थी।