कोरोना के बाद चमगादड़ से फैलने वाले इस खतरनाक वायरस ने दी दस्तक, भारत का कोविड-19 अपडेट भी जानें
देश में 24 घंटे में कोविड-19 (Covid 19) के 18,840 नए मामले सामने आए हैं, वहीं पश्चिमी अफ्रीका के घाना में मारबर्ग वायरस ने दस्तक दी है। ये एक संक्रामक वायरस है जो इबोला से भी तेजी से बढ़ता है।पश्चिमी अफ्रीका में मारबर्ग वायरस ने दी दस्तक, 2 की मौतWHO ने इस नए वायरस को लेकर चेतावनी जारी कीभारत में बीते 24 घंटे में कोरोना के 18,840 नए मामले
देश में कोरोना की रफ्तार एक बार फिर तेज होने लगी है और 24 घंटे में 18 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी अफ्रीका में नए वायरस ने दस्तक दे दी है। इस वायरस का नाम ‘मारबर्ग’ (Marburg) है और ये बेहद खतरनाक बताया जा रहा है। WHO ने इस नए वायरस को लेकर चेतावनी भी जारी कर दी है।भारत में बीते 24 घंटे में इतने मामले
देश में 24 घंटे में कोविड-19 (Covid 19) के 18,840 नए मामले सामने आए हैं और 43 मरीजों की मौत हुई है। देश में कोरोना (Corona) के कुल मामलों की संख्या 4,36,04,394 हो गई है और 1,25,028 मरीजों का इलाज चल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के अनुसार कोरोना से कुल मृतकों की संख्या 5,25,386 हो गई है। इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,29,53,980 हो गई है। कोविड-19 से ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.51 फीसदी है। मृत्यु दर 1.20 प्रतिशत है।
पश्चिमी अफ्रीका में मारबर्ग वायरस ने दी दस्तक
पश्चिमी अफ्रीका के घाना में मारबर्ग वायरस (Marburg Virus) ने दस्तक दी है। ये एक संक्रामक वायरस है जो इबोला से भी तेजी से बढ़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गुरुवार को बताया था कि घाना में दो लोगों के नमूने लिए गए थे उनमें मारबर्ग वायरस निकला और इसी वजह से उनकी मौत हुई।
WHO का कहना है कि घाना में जो सैंपल लिया है, वह पॉजिटिव पाया गया है। ऐसे में इस संभावित खतरे को देखते हुए इससे लड़ने की तैयारी तेज की जानी चाहिए। जिन दो लोगों में ये वायरस पाया गया, उनमें दस्त, बुखार, जी मिचलाना और उल्टी सहित कई लक्षण पाए गए।
कैसे फैलता है मारबर्ग वायरस
जानकारों का मानना है कि मारबर्ग वायरस चमगादड़ से फैलता है। इससे पीड़ित लोगों को बुखार, सिरदर्द के अलावा इंटरनल ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखते हैं और फिर पीड़ित की मौत हो जाती है। इस वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है। पिछले साल गिनी (Guinea) में इस वायरस के पहले मामले का पता चला था।











