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तीन साल पुराने मामले में मुंबई कोर्ट ने अपनी पांच साल की बेटी के साथ यौन शोषण करने वाले पिता को पांच साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा है कि एक पिता अपनी बेटी का संरक्षण और विश्वासपात्र होता है, ऐसे में यह मामला और भी गंभीर हो जाता है। कोर्ट ने 40 वर्षीय पिता को मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कोई “त्वचा से त्वचा” का स्पर्श नहीं था। विशेष न्यायाधीश एचसी शेंदे ने कहा कि आरोपी की ओर से पेश की गई दलीलें हैरान करने वाली हैं। दलील में कहा गया कि पीड़िता ने कभी नहीं कहा कि उनके पिता ने अपनी उंगली से उसके गुप्तांग को छुआ था। न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह के तर्क हैरान करने वाले हैं। क्योंकि, पॉक्सो एक्ट में यौन उत्पीड़न के प्रावधान या परिभाषा में भी यह उल्लेख नहीं है कि हमलावर को पीड़ित के निजी अंग को कैसे छूना चाहिए और अगर पीड़ित पर हमलावर द्वारा हमला किया जाता है तो यह कितना अपराध है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान मामले में आरेापी पीड़िता का पिता ही है, ऐसे में दया याचिका ही गलत है और यह न्याय का उपहास होगा। कोर्ट ने कहा कि एक पिता अपनी बेटी का संरक्षक व विश्वासपात्र होता है, ऐसे में यह अपराध और भी ज्यादा गंभीर हो जाता है। 2019 में पीड़िता की मां की ओर से अपने ही पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था। पीड़िता की मां ने बताया कि 2019 में बच्ची के शिक्षक ने उसे उसके अजीब व्यवहार के बारे में बताया था। जब बेटी से पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि पिता उसके गुप्त अंगों को छूता था।

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